Posts

Showing posts from May, 2020

माँ गै ! आय तोहर कोरा में सुतितौं। Maithili kavita maa gai aay tohar kora me sutitaun

माँ गै ! आय तोहर कोरा में सुतितौं। बहुत समय व्यर्थ हम केलौं,यत्र तत्र भ्रमरेलौं गै। सौंसे सँ थाईक हाईर क तोरा सरण में एलौं गै। क्षणिक सुखक पाश में पैर कँ,इम्हर उम्हर भटकि गेलौं हम। कोना क ऐ विकट जाल में तोरा रहैत ग्रथित भेलौं हम ? माँ गै ! आय तोहर कोरा में सुतितौं। तोहर हाथक स्पर्श पाबि के सुखद स्वप्न विस्तार करी। आँचर के छाहैर में तोहर दीर्घकाल विश्राम करी। आय हमर मुन व्यग्र व्यथित भेल, ऐछ आँखि में पानी गै। बच्चा बैन क लिपटि लिपटि क भहैर भहैर हम कानी गै । माँ गै ! आय तोहर कोरा में सुतितौं। अहंकार के कारण माँ गै अते दीन हम सकुचैलौं। तोरा सँ जे दूर गेलौं हम तहिये सँ त थकुचेलौं। आब हमर मून नै मानय तोहर कोरा के ई चाहय। लेकिन देखही एखनो माँ गै अपन भाव के शब्द में बाँचय। माँ गै ! आय तोहर कोरा में सुतितौं। चऽल कतौ दूर चली माँ जत्त तू और हम रहितौं। हऽम पुनः बालक बैन रैहतौं कुनु तरहक व्यवधान नै पबितौं। नित प्रति तोहर मधुरवाणी सँ साँझक बेर भगवती गीत सँ। शिव नचारी समदाऊन आदि सँ कर्ण दुनू पवित्र हम करितौं। माँ गै ! आय तोहर कोरा में सुतितौं।        आ...